“हम लड़की से बात करेंगे बे! हम? राहुल सिंघम? हम सिर्फ प्यार करेंगे, तुम उसको बताओ मेरे बारे में। बताओ कि लड़का बहुत स्मार्ट है, सेक्सी है, देखने में…”
मुझसे रहा नहीं गया, “स्मार्ट? सेक्सी?”
शनिवार की शांत रात थी। मैं अपने कमरे में कुछ करने की सोच रहा था। तभी दरवाजे की घंटी बजी।
मैंने पूछा कि कौन है। बाहर से नशे में डूबी हुई एक आवाज आई, ऐसी जैसे कि दारू में तीन बार डिप किया हो उसे, “अबे खोलो साले”
मैंने कहा कि तुम दोनों ने दारू पी रखी है, मैं नहीं खोलता दरवाजा। दोनों मुझ पर अचानक से बिगड़ गए और पता नहीं क्या क्या बोलने लगे।
“साले, तेरे में ऐसा क्या है जो मेरे में नहीं है। अच्छी खासी सरकारी नौकरी करता हूँ। रोज अलग अलग कपड़े पहनता हूँ। डियो भी लगाता हूँ। घर में एसी भी है। और तो और रोज नहाता भी हूँ और मुंह भी धोता हूँ। बता साले?”
दूसरा फिर शुरू हो गया, “साला तुमसे ज्यादा स्मार्ट भी हैं (खुद ही, मन में खुद को स्मार्ट भी मान लिया वो भी मुझसे ज्यादा)। पच्चास हज़ार हर महीने मेरी तनख्वाह होने वाली है। क्या है तेरे में जो हम में या इसमें नहीं है?”
मैं समझ नहीं पा रहा था कि इनका मतलब क्या है। काफी सिरिअस भी लग रहे थे दोनों। मैंने सोचा दरवाजा खोलना मूर्खता होगी।
“दरवाजा खोल कमीने। आज तुझे जवाब देना ही होगा।” पहले ने फिर दोहराया।
“साला लड़की नहीं मिली कि तुम अब गेट नहीं खोलेगा! ये दिन भी देखना पड़ेगा, ये मैंने सोचा नहीं था। और ये सब एक लड़की के लिए! इस से अच्छा था दारू पी-पीकर मर ही जाते,” दूसरे ने कहा।
फिर मुझे सारा मामला समझ में आया कि मेरे दोनों मित्र, मान लीजिये एक का नाम राहुल है और दूसरे का राजीव। और ये भी मान लेते हैं कि एक के अगले दांतों के बीच इतनी खाली जगह है कि उस से दो साईकिल सवार समानांतर चलाते हुए निकल जायें। और दूसरे मित्र जो हैं उनके लिए ऐसा फ़र्ज़ करते हैं कि उनके सर पर बालों का ऐसा अभाव है जैसा की आपकी कार में पेट्रोल का।
ये दोनों बहुत ही फ्रस्ट्रेटेड थे और बार बार खुद को मुझसे कम्पेयर कर रहे थे। उनके तर्कों से ये ज़ाहिर था कि दोनों में से किसी ने भी काफी दिनों से आइना नहीं देखा है। या फिर दोनों ऐसे दोस्तों के बीच रहते हैं जो उन्हें लगातार मूर्ख बनाते रहते हैं।
ये दोनों फ्रस्ट्रेटेड प्राणी वहां से हिलने के लिए तैयार नहीं थे तो फिर मैंने भी आजिज आकर गेट खोल दिया। अन्दर घुसते ही दोनों की कैसेट फिर अटक गयी। “बताओ हम में ऐसा क्या नहीं है जो तुम में है!”
“साले, तुम पहले सर पर बाल उगाओ और तुम अपने दांत के बीच का अपना इंडिया गेट बंद करवाओ,” मैंने कहा दोनों से।
तो ये दोस्त जिसे मैंने राजीव माना है और जिसके सर पर हम ये मान कर चल रहे हैं कि बाल नहीं है, बिदक गया। “साला तुम ऐसे बात करेगा दोस्त से? मजाक उड़ाता है मेरा? तुम में ऐसा क्या है जो हम में नहीं है बे?” राजीव बिलकुल फ्रस्टिया के बोला।
राहुल, जिसके बारे में हमने माना है कि दांत के बीच में गैप है, से रहा नहीं गया और कहने लगा, “हाँ, बताना पड़ेगा। नहीं बताओगे तो यहीं जान दे देंगे! हमको बम बनाने भी आता है।”
“कौन सा बम बे?” मैंने पूछा।
“साले राजीव गाँधी को जिस से उड़ाया गया था न, हमही बनाये थे,” राहुल की बकवास जारी थी।
मैं फिर समझ गया कि ये पूर्णरूपेण मस्त है। मैंने फिर पूछा कि मुझे क्यों मारना चाहते हो? अपने ऑफिस में देखो कोई लड़की और बात करो।
“हम लड़की से बात करेंगे बे! हम? राहुल सिंघम? हम सिर्फ प्यार करेंगे, तुम उसको बताओ मेरे बारे में। बताओ कि लड़का बहुत स्मार्ट है, सेक्सी है, देखने में…”
मुझसे रहा नहीं गया, “स्मार्ट? सेक्सी?”
“अबे सुनो यार! बोलने में क्या जाता है। तू बस कहीं से इंतजाम कर दे बाकी मैं देख लूँगा,” राहुल खुश होकर लेकिन याचनामिश्रित शब्दों बोल रहा था।
“थोड़ा हम भी देखें…” राजीव बीच में शेयर मांग बैठा।
“पहले हम, तुम 40 साल के बाद। साला… सर पर बाल का उपाय नहीं और लड़की चाहिए इनको। चल भाग यहाँ से… हाँ यार अजीत, कहीं से भी यार, एक बात मिला तो सही! यार कैसे भी… प्लीज़!” राहुल एकदम भावुक हो गया और उसका टोन बदल गया था।
इस बात का असर राजीव पर कुछ यूं हुआ कि हवा का एक झोंका आया और उसके सर से लगभग 73 बाल उड़ गए!
“अबे कुछ पैसे ले ले यार। यार अकेले मन नहीं लगता यार… तू तो जानता ही है यार… प्लीज़, कहीं से भी! एक बार…” राहुल के फ्रस्ट्रेशन का लेवल बढ़ता जा रहा था।
राजीव भी पीछे नहीं था। उसने बोली लगानी शुरू कर दी कि वो मुझे इतने पैसे देगा। मैं बताने की कोशिश कर रहा था कि मैं कोई दलाल नहीं हूँ।
“फिर साला कैसे लाते हो इतनी लड़कियाँ! साला हमें एक नसीब नहीं और तुम साले इंडिया का मैप तो छोड़ो वर्ल्ड मैप में भी कलरिंग शुरू कर दिए। आज तुम्हें जवाब देना ही होगा,” राहुल अपने नशे के चरम पर पहुँच चुका था।
“हाँ हाँ देना ही होगा,” राजीव ने आज्ञाकारी दोस्त की तरह हाँ में हाँ मिलायी।
मैं उन्हें ये समझाने लगा कि ये हो जाता है, कोई प्लानिंग नहीं है जैसा वो लोग सोच रहे थे। और मैं कोई दलाल नहीं कि लड़कियाँ सप्लाय करूँ। सबकी इज्जत है। वो ऐसा सोच भी कैसे सकते हैं।
मैं ये सब कह ही रहा था कि राहुल मेरे पैरों पर गिर गया, बायाँ पाँव खाली देख कर राजीव उसमें लटक गया। दोनों रोने लगे कि उन्हें लड़की दिलवा दो जैसे कि मेले का खिलौना हो।
फिर दोनों वहीं नशे में ही सो गए। सुबह जगाया तो दोनों ने इस घटना की सच्चाई पर ही सवाल उठा दिया। अब मैं क्या कह सकता हूँ, कोई रिकोर्डिंग तो की नहीं मैंने!


