Dabangg 2 ‘Fevicol se’ lyrics and meaning

अंगडाइयां लेती हूँ मैं जब जोर-जोर से
उफ्फ्फ! अंगडाइयां लेती हूँ मैं जब जोर-जोर से
उह्ह अहह की आवाज़ है आती हर ओर से
मैं तो चलूँ इस कदर
के मच जाए ये ग़दर
होश वाले भी मदहोश आयें रे नज़र
मेरे फोटो को सीने से यार, चिप्कले सैयां फेविकोल से
फेविकोल से.. फेविकोल से..
मैं तो कब से हूँ रेडी-तैयार
पटाले सैयां मिस-कॉल से
मेरे फोटो को सीने से यार
चिपका ले सैय्याँ फेविकोल से..
कवि इन पंक्तियों में नायिका की बेचैनी का वर्णन कर रहा है और कहता है कि वो बार बार और जोर जोर से अंगडाइयां ले रही है और जब वो इस तरह से अपने बदन को जोर जोर से खींचती है तो हर तरफ से उह और आह की आवाजें आती हैं। इस से पता चलता है की वो एक रिहायशी इलाके में रहती है और खिड़कियाँ खोल कर इस तरह की बेचैनी दिखाती है।
आगे अपनी सुन्दरता और ज़ल्वो का बखान करते हुए नायिका कहती है कि उनकी चाल में तो ऐसा जादू है की वो जिस और भी निकलती हैं एक ग़दर सा मच जाता है। और तो और नायिका को ये कहने में जरा भी संकोच नहीं है कि उनके कारण कितने ही अच्छे भले लोगो का होश खो जाता है और वो उनके जलवे देख देख कर मदहोशी की आगोश में खो जाते हैं।
इन पंक्तियों के द्वारा कवि उनकी खतरनाक जवानी से हमारी मुलाक़ात करवाते हैं।
अगली पंक्तियों में कवि ने नायिका के द्वारा नायक को एक प्रेम निवेदन करवाया है। नायिका बेचैन होकर ये कह रही हैं की अगर उन्हें नहीं तो कम से कम उनकी तस्वीर को ही नायकअपने सीने में फेविकोल (जो की बहुत ही उम्दा चिपकता है और ऐसा चिपकता है की सीना कट जाये फोटो न उखड़े) से चिपका ले।
इस से ये पता लगता है की उनका प्यार कितना गहरा और निष्काम है। वो ये समझती है की फोटो में उनकी आत्मा है और अगर उनका प्रेमी फोटो भी सीने के पास रखेगा तो उन्हें काफी ख़ुशी महसूस होगी। ऐसी निश्छल और स्नेहिल प्रेमिका का आजकल अभाव सा हो गया है।
आगे नायिका ये भी कहती हैं कि वो उनके इंतज़ार में लम्बे समय से तैयारबैठी हुई हैं। वो बस नायक के एक मिस्ड कॉल का इंतज़ार कर रही हैं कि मिस्ड कॉल आयेगा और वो दौर कर अपने प्रेम का निवेदन कर देगी।
ये बात ये साबित करती है की आज की तारिख में भी इतनी सिद्दत से चाहने वाली और पैसो से प्रेम न करने वाली लडकियां हैं जो कि खुल्लम खुल्ला प्रेमी को कहती है कि कॉल करके पैसे न खर्च करे और सिर्फ मिस्ड कॉल से एक सिग्नल दे दे, वो समझ जाएगी। ऐसा प्रेम आज कल तो नहीं दिखता जहाँ प्रेमिकाओं का ध्यान अपने प्रेमी के बटुए पर ही होता है।
प्यार करले तू आज अंगूर की डॉटर से
नसीहत भूल जायेगा तू एक क्वार्टर से
पीने वाले को भी जीने का मज़ा आएगा
यह वो दारू है जो चढ़ जाए सिर्फ वाटर से
यहाँ पर नायिका के आसपास वाले उसका सहयोग करते दीखते है जबकि वो खुद भी उसके दीवाने रह चुके हैं। आज के दौर में तो लोग लड़की के लिए गला काटने को उतारू हैं फिर इस प्रकार का स्नेह की नायिका को उस के पसंद का ही लडका मिले, ऐसा परस्पर स्नेह इस ‘कट-थ्रोट कम्पटीशन’ के दौर में तो नहीं दीखता।
ख़ैर, नायक अपने सहयोगियों के साथ नायिका की जवानी का वर्णन करते हुए सबसे कहता है की आ और इस अंगूर की बेटी अर्थात यौवन की रसीली मल्लिका से इश्क फरमा और दावा करता है कि वो लोग सारा ‘ज्ञान’ सिर्फ एक क्वार्टर में भूल जायेंगे। यहाँ क्वार्टर का व्यापक अर्थ ये भी है की उसकी जवानी की सिर्फ एक चौथाई में इतनी शक्ति हैकि नायक को मदहोश कर दे।
आगे कवि कहता है कि ये दारू (प्रेमिका की रसीली जवानी) उन्हें जिंदगी देती है जो इसे होठों से लगाकर पीते हैं और इसके लिए किसी भी तरह के ‘सहयोग’ (अर्थात फोरेप्ले) की जरूरत नहीं है, ये अपने आप में ही इतनी नशीली है की बस चढ़ जाती है।
आजा मेरे राजा, तुझे जन्नत दिखाओं मैं
बर्फीले पानी में फायर लगाऊं मैं
अपने आसपास के दीवानों का इतना प्रेम देख कर नायिका के मन भी प्यार उमड़ता है और वो अपने प्रेमी को पुकारते हुए कहती है कि मेरे प्रिय, तुम बस पास तो आओ, देखोमैं तुम्हे कैसे स्वर्ग का दर्शन करवाती हूँ . बस देखते जाओ कि कैसे मैं तुम्हारे इस ठंढे बर्ताव में भी उफान ला देती हूँ।
नायिका को अपने हुस्न पर पूरा विश्वास है कि वो, प्रेमी चाहे कितना भी ‘डिसइंटरेस्टेड’ हो उसे वो सारी तरकीबें आती है जिस से वो उसे हर तरह के आनंद से अवगत करवा सकती है। ऐसी प्रेमिकाएं आजकल मिलती कहाँ है! आजकल तो बस मज़े करो और निकल लो का ज़माना है। इस प्रेमिका को मेरा साधुवाद जो कि आजकल के फ़ास्ट टाइम में भी इतना इंतज़ार कर रही है।
सारे इंडिया..
सारे इंडिया को तूने ग़ुलाम किया रे
प्रेमिका के सपोर्ट में उसके दीवाने उसपर मीठा आरोप भी लगाते हैं की उसने अपने हुस्न के जादू से सरे भारतवर्ष को ग़ुलाम बना रखा है।
मैं तो तंदूरी मुर्गी हूँ यार
गटका ले सैय्याँ अल्कोहल से.. ओ येआ!
मेरे फोटो को सीने से यार, चिपका ले सैयां फेविकोल से
फिर नायिका इस पर कहती है कि वो तो एक तंदूरी मुर्गी है और नायक को खुला आमंत्रण देते हुए ये भी कहती है की उसे वो अल्कोहल अर्थात नशे के साथ अपने अंदर समाहित कर ले।
व्यापक अर्थ ये है की नायिका का खुद को तंदूरी कहना इस बात पर ध्यान खींचता है की उसकी जवानी अपने प्रेमी के इंतज़ार की आग में पूरी तरह से पक चुकी है अर्थात वो पूर्णरूपेण तैयार है नायक के आगोश में घुल जाने के लिए। और अगली पंक्तियों में वो फिर नायक को अपने फोटो को सीने में फेविकोल के मज़बूत गोंद से चिपकाने कहती है।
लोग कहते हैं मुझे, मैं तो हूँ नमकीन बटर
काट दूँगी मैं दिल को, मेरी जवानी है कटर
मेरा जलवा जो देख ले, वो फैंट हो जाए
क्लोज करके तू रख ले अपने नैनो का शटर
आगे कवि सौंदर्य रस का इस्तेमाल करते हुए नायिका की मदमस्त जवान शरीर का वर्णन करते हुए नायिका से कहलाता है कि उसे लोग नमकीन मक्खन कहते है और उसकी नैन इतने तीखे हैं की वो दिलों को चाक कर देते हैं। नायिका आगे कहती है की जिस किसी ने भी ग़लती से उसके खिड़की में झाँक कर उसका जलवा देख लिया उसके होश उसी वक़्त फाख्ता हो जाते हैं।
कवि बार बार इस बात पर ध्यान दिलाता है की नायिका या तो जलवा करते वक़्त खिड़कियाँ खुला रखती है या उसके घर में खिड़कियाँ है ही नहीं। यहाँ पर कवि ने नायिका के जलवे का वर्णन पर्वत पर के जलते तूर से किया है जहाँ खुदा ने अपना नूर दिखाया तो लोग बेहोश हो गए थे। इसीलिए नायिका सचेत करते हुए झाँकने वालो से कहती है कि वो अपनी आँखे बंद ही रखे तो बेहतर है।
पब्लिक शहर की करे है तेरा वेट रे..
अरे ठुम्म्के जो कमरिया, हिले जिला क्या स्टेट रे..
पर कहानी ओह रानी पुरानी है तेरी
फिर भी फोटो को..
तेरे फोटो को सीने में यार चिपका लूँगा मैं फेविकोल से
यहाँ पर नायक पूरे शहर की डेस्पेरेशन की तरफ नायिका का ध्यान लाते हुए कहता है की सारा शहर उसके कमर के जलवे का इंतज़ार कर रहा है जिसमे पूरे जिले और राज्य तक को हिला देने की क्षमता है। नायक ये भी कहता है की उसने पहले भी ऐसे जल्वागरो को देखा है फिर भी वो नायिका के फोटो को अपने सीने पर फेविकोल से चिपकाने के लिए तैयार हो जाता है।
माय जिप्सी विथ साईरन तैयार
भगा ले इसे पेट्रोल से..
पेट्रोल से.. पेट्रोल से..
मेरे फोटो को सीने से यार चिपका ले सैयां..
चिपका ले सैयां फेविकोल से
फेवी.. फेविकोल से.. फेविकोल से..
नायिका समझ जाती है की नायक उसपर मोहित हो चूका है और यही वो वक़्त है जब उसे नायक को सबकुछ छोड़ कर अपने साथ ले जाने के लिए कह सकती है। वो नायक को बताती है कि उसकी पूरी तैयारी जबरदस्त है और उसने साईरन वाली जिप्सी, जोकि सिर्फ पुलिस को मिलती है, का इंतजाम कर रखा है।
यहाँ पर कवि ये बताता है की नायिका काफी समझदार है इसीलिए उसने ऐसी गाडी का प्रयोग बेहतर समझा जो बेरोकठोक कहीं से भी निकल जाये। इस बात से ज्ञात होता है की नायिका का प्रेम सच्चा है।
नयन हम लड़ाएँगे बेबी-डॉल से
लोंडिया पटाएंगे मिस-कॉल से
बैट बॉल से, सिनेमा-हॉल से,
अरे मैरिज-हॉल से, ओवरआल से
तेरे फोटो को सीने में यार चिपका लूँगा मैं फेविकोल से
अब जबकि दोनों का मिलन लगभग तय है बाकि जनता भी काफी खुश होती है और तरह तरह के शब्दों का प्रयोग करते हुए अपनी ख़ुशी का इजहार करती है। नायक ख़ुशी में ये स्वीकार करता है कि वो मदमस्त लडकियों को (जिसे कवि लौंडिया कहता है) मिस्ड कॉल से पटायेगा।
और अंत तक इस बात की पुष्टि कर के कहता है की वो अपने सीने पर नायिका की तस्वीर फेविकोल से चिपका लेगा। ख़ैर अब जब दोनों का मेल हो ही गया है तो उसकी खास जरूरत है भी नहीं।
मेरे फोटो को सीने में यार
चिपका ले सैय्याँ..
चिपका ले सैयां फेविकोल से..
यहाँ नायिका ख़ुशी में अपनी पुरानी बात दोहरा रही है जिसका अब कोई मतलब नहीं रह गया है। अब तो दोनों जिप्सी में न जाने कहा जायेंगे।
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