‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए बम फोड़ने वाले आतंकी क्या वाक़ई किसी धर्म के नहीं होते?

सिर्फ इराक़ में आइसिस वालों ने अभी तक 1,70,000 से ज्यादा शिया मुसलमानों को मार दिया है। ये कैसे इस्लाम को आगे ले जा रहे हैं मुसलमानों को ही मार कर!

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एक मुसलमान की बातों से दाढ़ी रखने वाले कुछ लोग नाराज़ हो गए हैं!

इरफ़ान ख़ान ने ईद के दिन बकरों की बलि और ‘क़ुर्बानी’ को लेकर एक जगह कुछ बोला। और वो बात बोली जो आप आमतौर पर किसी मुस्लिम के मुँह से, भले ही वो उसमें विश्वास करता हो, कभी नहीं सुनेंगे क्योंकि हिम्मत नहीं होती। इस्लाम पर कुछ भी बोलना सीधा ब्लासफेमी मान लिया जाता है… Continue reading एक मुसलमान की बातों से दाढ़ी रखने वाले कुछ लोग नाराज़ हो गए हैं!

रघुराम राजन, फेसबुकिया अर्थशास्त्री, और भारतीय अर्थव्यवस्था

मुझे जब चिदंबरम्, बरखा, राजदीप जैसे लोग राजन के जाने से तिलमिलाते दिखते हैं तो लगता है कि शायद उनका जाना ठीक ही होगा। क्योंकि ऐसे लोगों का अजेंडा पूरे देश के सामने है।

नहीं बैसाखनंदन, मोदी की विदेश यात्राओं से ग़रीबी नहीं मिटी…

ना ही किसानों के घर में मरे बाप और भाई लौट कर आने लगे, ना ही दाल के भाव कम हो गए, ना ही सड़कों के गड्ढे भर गए, ना ही दंगे बंद हुए, ना ही निचली जातियों के दिन फिर गए…

इंटेलेक्चुअल लेजिटिमेसी की राह वन-वे होती है

ये अपनी फ़र्ज़ी बुद्धिजीविता में इतने धँस चुके हैं कि मोदी की राजनीति और हिंदू धर्म के प्रति घृणा को खुलकर घृणा कहने में हिचकिचाते हैं। इससे इनको ये डर लगता है कि ये ‘ऑब्जेक्टिव’ नहीं रह जाएँगे। जबकि इन्हें अच्छे से पता है कि इनकी ये ‘आलोचना’ कितनी बायस्ड और मौक़ापरस्त है।