जश्न-ए-मातम

उदास होना भी अजीब लगता है
ये जश्न जब भी होता है
जब भी ऐसे ढोलक सी
दिल को छू लेने वाली आवाज़ आती है

या कोई बताता है
जब
उनके खुश होने के तरीके को
मैं उदास हो नहीं पाता

तुम्हारी बारात जब निकलती है
रोज़ की चहल पहल के बीच
छोड़ जाती है
हलचल और देखने वालो का हुजूम
सबको जल्दी है
कहीं से कहीं जाने की

जब जश्न है
तो फिर मैं और मेरे दोस्त
घरवाले, शहर वाले,
पड़ोसी, नगरवाले, साथी,
वो जिन्हें मैं जानता हूँ
और
वो भी जिन्हें मैं नहीं जानता
खुश क्यों नहीं होते?

शायद तुम्हारे खुश होने का तरीका
गलत है
या थोडा अलग है पूरी दुनिया से
या शायद तुम इंसान नहीं हो…

#dedicated to Delhi High Court blast victims and scores of the ones who died in various terror attacks in india and the world.

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