बड़े जर्नलिस्ट

आज फर्स्ट इयर के बच्चों के ओरिएंटेशन के लिए किसी तथाकथित बहुत बड़े जर्नलिस्ट को बुलाया गया था। वैसे जिसको भी बुलाया जाता है वो आम तौर पर बड़े ही होते हैं। और अगर देखने से, या बोलने से बड़े न लगें तो उनके बारे में बताकर उन्हें बड़ा साबित कर दिया जाता है।

ख़ैर, हमें इन बड़ी बड़ी बातों से क्या लेना। यकीन मानिये पूरी फैकल्टी में सिर्फ 2-3 लोग ऐसे थे जिन्हें इस बड़े जर्नलिस्ट जी के बारे में पता था। हाँ ये बात उन्हें भी पता नहीं थी कि वो बड़े जर्नलिस्ट थे। वैसे हमें ये समझ लेना चाहिए था कि अब बुलाया है तो बड़े जर्नलिस्ट ही होंगे, क्योंकि आज तक हमें किसी ने भी कहीं भी नहीं बुलाया।

बकौल, उन्होंने अपना संभाषण शुरू किया। किस बात पर बोले ये बताया नहीं। बड़े जर्नलिस्ट ये कभी नहीं बताते। मैंने कई बार देखा है कि जिनका तथाकथित रूप से बड़ा नाम होता है अपने क्षेत्र में वो आम तौर पर संभाषण का विषय बताना गैरज़रूरी समझते हैं। ताज़ातरीन उदहारण महान कोर्पोरेट ट्रेनर श्री डॉ सोमेश चड्ढा जी का था जिन्होंने दो दिन बोला पर टॉपिक समझा नहीं पाए।

ख़ैर, जर्नलिस्ट महोदय बोलने लगे। ऐसे ही आजकल क्या चल रहा है मीडिया में। बेचारी राखी सावंत को भी घसीट दिया। ये भी बोल गए, “ये जो शाहरुख़ खान हैं, हम तो फिल्में नहीं देखते तो हमें तो पता नहीं कि कितने बड़े आदमी हैं …” हम सुन रहे थे। अब हमारे जैसा आदमी सुनता ही है। हमें तो डर है कि जिस हिसाब से हम लिखते हैं एक दिन कॉलेज मैनेजमेंट सुप्रीम कोर्ट से गैग आर्डर न ले आये!

सुन ही रहे थे और आदत के मुताबिक थोड़ी बहुत गाली-गलौज भी कर रहे थे। बड़े जर्नलिस्ट जी बता रहे थे कि किस तरह मीडिया परिदृश्य बदल रहा है और कैसे वो ये सुनिश्चित कर रहे हैं कि ठीक ठाक कंटेंट ही लोगों को देखने को मिले, कैसे जो है ये ‘कूल डूड और हाट चिक्स’ की भीड़ (कृपया व्यापक अर्थ लें, दिल पर न लें क्योकि लेकर भी कुछ कर नहीं पाएंगे) इस देश के जर्नलिज्म का भविष्य है  इत्यादि इत्यादि।

बीच बीच में बड़े लोगों वाली बात भी बोल रहे थे कि कैसे पहले मीडिया शाहरुख़ के पीछे भागती थी और अब कैसे ये ‘नाचने गाने वाले’ मीडिया को आकर 4 बजे सुबह तक इंटरव्यू देते हैं। (शायद शाहरुख़ कल इंडिया टीवी के दफ्तर में 4 बजे तक बैठे थे)

सब ज्ञान-वान बांटने के बाद प्रश्नोत्तर का समय आया। बेचारा नया नया बारहवीं पास लौंडा कुछ पूछ बैठा। क्या पूछा हमें याद नहीं पर हाँ हमने ये वाली लाइन सुन ली: “आज ये चलता है कि डांस इंडिया डांस में कौन 12 साल का लड़का झटके लगा रहा है? ये कोई नहीं दिखाता की किसी गरीब का बच्चा CBSE में टॉप कर गया! आजकल शाहरुख़ से किसका चल रहा है? सलमान है? सलमान ही नाम हैं न? अब बताइए सलमान क्या किसी का आइकॉन बन सकता है? आइकॉन तो वो होना चाहिए जिसने गरीबी झेली और पढ़कर IAS हो गया …”यही वो पल था जब मैं समझ गया था कि ये वाकई बहुत बड़े वाले हैं और शांति से तीन चार माँ-बहन की गालियाँ देते हुए निकल गया (और कर भी क्या सकता था, बड़े जर्नलिस्ट जो ठहरे!!!)

#bade journalist, #journalism, #orientation to journalism, #journalist, #BJMC, #journalism students
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