युवा प्रेम की महागाथा: संघर्ष उसे बताने की

 

हमारे एक मित्र हैं मुदित कुचेरिया (सुरक्षा कारणों से नाम बदल दिया गया है) बहुत ही शांत स्वभाव के हैं। कई कार्यों में पारंगत होने के कारण विपरीत लिंग के लोगों में काफी लोकप्रिय हैं। जवान हैं, तंदुरुस्त हैं (हवा पहलवान की तरह, आइडेंटिटी पता न लगे इसीलिए तंदुरुस्त लिख रहा हूँ), और अत्यंत सुन्दर भी। वैसे भी जो आदमी काम करता है वो सुन्दर हो ही जाता है। ख़ास कर वैसे समय में जब हर एक लड़के की ये परेशानी है कि साला इतनी सुन्दर लड़की ऐसे छिछोरे, बदसूरत, कुपोषणग्रस्त अजीत भारती (कभी कभी खुद की भी लेनी पड़ती है, ह्यूमर के लिए करना पड़ता है) जैसे लौंडे के साथ क्यों है? ये धरती फट क्यों नहीं जाती… मुझे कोई बाज़ अपने पंजे में दबोच कर उड़ क्यों नहीं जाता …

मैं साला कूल डूड बना फिरता हूँ, आँखों के ऊपर स्टील का रिंग घुसेड़ लेता हूँ जबकि पता है कि बहुत बड़ा चूतिया दिखता हूँ, फ़ोटो घटिया खींचता हूँ और बहुत खींचता हूँ कि शायद एक दो बढ़िया निकल आये, सेफ साइड के लिए ज्यादातर लड़कियों के लेता हूँ ताकि उस पर बिना काम के तीन हज़ार दो सौ उन्तीस लाइक और ढाई हज़ार कमेंट्स, जिसमें दो हज़ार खुद के ‘थैंक यू, ‘लव यू बिच’, इत्यादि ही होते हैं, आ जाते हैं, और लडकियां साला इसके लिए परेशान हैं?

ख़ैर मुद्दे पर आते हैं। आज खालीपन में फ़ोन में स्क्रॉल मार रहा था कि इसका प्रोफाइल पिक देखा। ऐसा कभी नहीं देखा था। मुदित हमेशा से ही शांत सा, लड़कियों की भीड़ में काम करने वाला लड़का था, कहता था यार लडकियां न हो तो काम ही नहीं होता। इसके बावजूद, उसने आजतक अपनी प्रोफाइल पिक में खुद को छोड़कर किसी को जगह नहीं दी थी। वैसे कई लडकियां उसके साथ के फ़ोटो अपनी प्रोफाइल पिक में ज़रूर डालती थी। मुदित को इस से फर्क नहीं पड़ता था पर हाँ बाकी लौंडे बहुत जलते थे कि साला फ़ोटो तो मेरे भी साथ खिंचवाई थी इन लड़कियों ने पर मैं प्रोफाइल पिक मैं क्यों नहीं हूँ?

आर्टिस्ट लड़का है तो प्रोफाइल पिक (हाँ भाई डी पी, बिहार में डीपी मतलब दुर्गा पूजा समझे कुछ) भी आर्टिस्टिक ही थी। और ऐसी थी कि आप लड़के कि मनोस्तिथि का अंदाजा लगा सकते हैं। चौखुट, यानि स्क्वायर फ्रेम, फ़ोटो को ऐसे क्रॉप कर के डाला था कि लड़का एक कोने से झाँक रहा हो और लड़की दूसरे से। लड़के का करीब तैंतीस, थर्टी थ्री, और लड़की का सैंतीस, थर्टी सेवेन, परसेंट चेहरा डायग्नॉली दिख रहा था। फिर मैं उस लड़की के प्रोफाइल पिक का भी जायज़ा लेने घुसा। देखा उसमे उसने पूरी तस्वीर लगायी हुई थी।

अब भाई साहब मेरा दिमाग ठनका। सेम फ़ोटो लड़के ने एक तिहाई यूज़ की है और लड़की ने पूरी। मतलब तो साफ़ है कि यहाँ युवावस्था के प्रेम में संघर्ष की महागाथा चल रही है। द गर्ल इस फुल्ली इन टू इट बट द गाय इज़ हेजिटेन्ट। आई गेट इट, आई सो सो गेट इट माााान!

मुदित (याद रहे ये बदला हुआ नाम है और कोई सम्बन्ध महज़ कोइंसिडेंस है) के सामने पूरी दुनिया थी लेकिन उसने कभी किसी लड़की को ‘वैसी’ निगाह से नहीं देखा था भले कुछ सतहत्तर, सेवेंटी सेवेन, हज़ार के करीब फोटोज में वो लड़कियों के साथ देखा गया है। यहाँ पर उसका सिर्फ एक तिहाई फ़ोटो में दिखना और लड़की को भी उतना ही दिखाना इस बात का सबूत है यहाँ एक प्रेम संघर्ष चल रहा है, एक अंतर्द्वंद्व है, क्या मैं प्रेम में हूँ? क्या वो भी प्रेम में है? या वो भी उन तीन सौ पैंसठ लड़कियों में से एक है जो बस मेरी लोकप्रियता के कारण मेरे साथ फ़ोटो खिंचवाती है?

लेकिन वो तो इस फ़ोटो में खुश लग रही है? पर लडकियां तो आम तौर पर फ़ोटो में खुश ही रहती हैं? लेकिन ये मेरी तरफ आशा भरी निगाह से देख भी तो रही है? क्या ये सारे किस्से मेरा दिमाग मुझे दिखा रहा है या सत्य यही है?

मानसिक उहापोह से गुजर रहा है हमारा नायक। और नायिका को पता भी नहीं। नायक मुदित आर्टिस्ट आदमी है, पहले ही कहा जा चुका है। मन का बहुत शांत पर दिल के चंचल होते हैं ये आर्टिस्ट लोग, कह दे रहा हूँ। पर्सनल अनुभव है, हम भी आर्टिस्ट हैं और हमारा भी दिल है और हमने भी कभी किसी कि फ़ोटो लगायी थी या शायद नहीं, हमने फ़ोटो नहीं लगायी थी क्योकि हमारा संघर्ष नहीं था। हमारा मामला सेटल्ड था।

साहब क्या बताएं इस उम्र के बारे में, हम भी कभी बाईस के थे और … रहने दीजिये। नायिका को पता नहीं और मुदित अपने एक मित्र से लड़ गया कि वो सिर्फ और सिर्फ उसकी है। लड़को में ये ख़ास गुण होता है। भीतर ही भीतर इस सोच में हैं कि क्या उसे भी ‘प्यार’ है और खुद भी श्योर नहीं कि उन्हें प्यार हुआ है या इश्क़ के सात में से पहले मक़ाम के पीछे वाले में अटके पड़े हैं।

हमारे यूपी बिहार में ऐसा रोज़ होता है। लड़की को पता भी नहीं और लौंडे एक दूसरे के सर इसीलिए फोड़ देते हैं, हाथ इसीलिए तोड़ देते हैं कि पीली वाली उनकी थी इसने ऐसे कैसे कुछ भी बोल दिया। लड़की अगले दिन न्यूज़ में पढ़ती है कि लौंडा मर गया मार पीट में एक लड़की के चक्कर में और अगर उसका नाम भी हो तो उसे लगता है कोई और अनीता होगी …

मुदित का स्ट्रगल चल रहा है और मुदित जैसों का संघर्ष चलता रहता है। काफी दिनों तक चलता है और लड़की को बिलकुल पता नहीं होता। लेकिन मुदित परेशां इस बात से है कि उसने तो चलो उसकी फ़ोटो लगायी लेकिन ये कैसे कि लड़की ने भी वही फ़ोटो और वो भी पूरी की पूरी लगायी है?

क्या मुदित सत्य को झेल पायेगा, क्या नायिका को नायक के संघर्ष का पता चलेगा, क्या मुदित अपने दोस्त का सर फोड़ पायेगा, या लड़की लापरवाह सी किसी और लड़के के साथ वाला डीपी लगाकर मुदित का दिल तोड़ देगी?

इंतज़ार कीजिये: ‘युवा प्रेम की महागाथा: संघर्ष उसे बताने की’ पार्ट द्वितीय का

 

Advertisements

Did you like the post, how about giving your views...

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s