जगता है तब भारत

भागती रेल के
धड़धड़ाते शोर से
जगता हूँ मैं
और बंद खिड़की की
दरारों पर देखता हूँ
ओस की दो लटकती बूँदें
जिसमें भागता हुआ जहान
उल्टा नज़र आता है

और नज़र आता है उसमें
कोई जो मडियथ
जो एक दिन केरल से उठता है
और चल पड़ता है
उड़ीसा के गाँवों में
लोगों को ज़िंदगियाँ बाँटने
ज़िंदगी जो खूबसूरत है

दिखता है मुझे
डाॅक्टर व्ही
अपनी टेढी ऊँगलियों को
आँखो की सर्ज़री सिखाते हुए
और बर्गर के दुकानों में
खोजते हुए आँखों का हस्पताल
वो बेचता है सपने…
देख सकने वाली आँखों के सपने

जुनून जगाता है दिलों में
अंशु गुप्ता
गूँजती है आवाज़ ज़ेहन में
जब वो ललकारता है
हमारे ज़मीर को
और कहता है
करने को
कपड़ों से बाँटता है वो
आत्मसम्मान

चेन्नई में माधवन दिखता है फिर
फावड़ा हाथ में लिए
लोगों ने कहा था कि
तू कैप्सिकम नहीं उगा सकता
उसने उगाया
और क्या ख़ूब उगाया
विज्ञान से बदल रहा है वो
खेती को
बता रहा है हमें
बंजर ज़मीं में फूल उगाना

रेल को निहारता दिखता है
सात साल का सुब्रोतो बागची
मैं उसे देखता हूँ
अपनी स्लेट पर ट्रेन बनाते
और फिर उकेड़ते हुए
माइंडट्री को
मुझे देखकर वो
एक मद्धिम सी मुस्कान देता है

दूर हुबली में कलकेरी का एक बच्चा
पूछता है मुझसे,
“व्हाट इज़ योर नेम?”
मैं बिना चप्पल के पैरों पर नज़र डालता हूँ
सर पर हाथ फेरकर
बातें करता हूँ
उसके एडम सर के बारे में
ये वही एडम तो है
स्वर्ग से वो धरती पर आ गया है
जिसके एक कोने में
लगा रहा है वो
ट्री आॅफ नाॅलेज़
पास ही मुस्कुरा रहा है
कोई सचिन देसाई

ज्योति ताई
कचड़े से हीरे निकाल रही है
उस हीरे की चमक दिखती है
सैकड़ों महिलाओं के चेहरे पर
जिसकी जिंदगी बदल दी ताई ने

वहीं आदर्श गाँव में
ईंटें लगाता हुआ
पोपट राव दिखता है
और दिखता है वो
फूली हुई छाती के साथ
कलाम के सामने

सरन साहब
गाँव में दे रहे हैं
देसी पावर
गोबर और सूखे पौधों से

ओस की बूँदें ठंढी हो रही हैं
देवरिया के बरपार में
बर के पार
गाँव में खुद को खड़ा पाता हूँ
तमाम दोस्तों के साथ
नाचता हूँ आल्हा की तानों पर
‘ललका रुमलबा ले ले अईहै’
सोचता हूँ बरारी गाँव के
राजू के सपने के बारे में
सपने मर जाते हैं
आधी भारत के करोड़ों राजुओं के
वो वहीं धूल में जिंदगी गुज़ार देगा

फिर नाचता दिखता है
ज़ोखिम चाचा
आँखें मटकाता
हमारे छिछले ज्ञान को गहराई देता
बताता है कि E=MC sq
से ज्ञान नहीं आता
ज्ञान आता है करने से
जो कोई बंकर राॅय करने आता है
वो आता है १९७२ में
और शुरू करता है बेयरफुट काॅलेज़
और बदल देता है तिलौनिया को
११० गाँवों को
और देखता है सपना
पूरे भारत को बदलने का

पर क्या बदलेगा मेरा भारत?
क्या बदलेगा तुम्हारा भारत?
क्या बदलेगा हमारा भारत?

शायद नहीं
या शायद हाँ
जी हाँ, शायद हाँ
मेरा भारत जवान है
मेरे दोस्त फीकी मुस्कान देते हैं
मजबूरी की मुस्कान नहीं
ये भविष्य के चेहरे को देखकर
उसे बदलने पर मजबूर करने वाली
मुस्कान है
बदल रहा है देश
बदलेगा मेरा देश

बूँदें खिलखिला रही हैं
उगता सूरज झाँक रहा है
मैं खिड़की खोलता हूँ
रोशनी चूमती है मुझे
मैं मुस्कुरा रहा हूँ
आज गाँधी ने गोद में ले लिया है मुझे

#JagritiYatra #ChangingIndia

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