तुम मिलो मुझे

तुम मिलो मुझे
अपने सारे इम्परफेक्शन्स के साथ
बिखरे बालों के साथ
समंदर को घंटों निहारते हुए
दुनिया भर की रेत समेटे जूतों में

तुम मिलो मुझे
सूरज की लाली
अपने चेहरे में लपेटे हुए
अलसाई सी सुबह में
शांत आवाज़ों को सुनते हुए

तुम मिलो मुझे
महानगर के पागलपन में
किसी शांत कोने में
अपनी किताब के पन्नों को
मेरी गोद में बिखेरते हुए

तुम मिलो मुझे
फ़ेसबुक के इन-बाॅक्स में
अपने ढेर सारे स्टिकर्स के साथ
बताओ मुझे उस ख़ूबसूरत दोस्त के बारे में
जिसके साथ तुमने आज का दिन गुज़ारा

तुम मिलो मुझे
मेरे ख़्वाबों में
रोशनी से भरी हुई
आँखों के साथ
किसी अनजान जगह पर

तुम मिलो मुझे
अपने इम्परफेक्शन्स के साथ
समझो मुझे
मेरे इम्परफेक्शन्स के साथ

—-
उन सबको समर्पित जो कभी वैसे ना हो पाए जैसा चाहा गया, और उन्हें भी जो रोबोटों की तलाश करते हैं।

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