क्या बारहवीं पास होना भविष्य में फ़ेल होने की निशानी है?

20140529-143315-52395370.jpg
Smriti Irani after taking oath of office and secrecy at Rashtrapati Bhavan

हाल ही में संपन्न हुए चुनावों से ना तो जनता उभरी है न ही राजनेता। व्यक्तिगत चुटकियों, आक्षेपों और आरोपों का दौर, थोड़ा कम हो गया हो पर अभी भी ज़ारी है। मोदी सरकार के समर्थक अभी भी उसी मूड में हैं मानो मोदी फाॅर पीएम अभी सफल नहीं हुआ हो।

अगर मोदी-भक्तों के सामने एक नई स्वघोषित ज़िम्मेदारी आ गई है मोदी की हर बात के समर्थन का तो दूसरी ओर विपक्ष वाले अभी भी ये मानने को तैयार नहीं हैं कि प्रधानमंत्री कैबिनेट का निर्धारण करता है न कि वह इसमें विपक्ष से अनुमति लेने जाएगा।

ख़ैर जो भी हो, कुल मिलाकर पहली बार लग रहा है कि जनता के राजनैतिक ज्ञान में इज़ाफ़ा हुआ है और वो इसका इस्तेमाल भी कर रही है।

कल एक बेहूदगी भरा ट्वीट आया मोदी की कैबिनेट में स्मृति ईरानी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर इस पूर्वाग्रह के साथ कि वो शिक्षा संबंधी मानव संसाधन मंत्रालय कैसे संभालेंगी। ये ट्वीट काँग्रेस के अजय मानक ने किया। क्यों किया ये वही जानें पर ताज्जुब की बात ये है कि पिछले दस वर्षों में हावर्ड, आॅक्सफोर्ड के विद्वानों द्वारा चलाया जाने वाला देश वर्त्तमान में अपनी पहचान ढूँढता नज़र आ रहा है।

दो बातें हैं कि क्या राजनीति में एक न्यूनतम योग्यता चाहिए या शैक्षणिक योग्यता चाहिए? तो क्या किसान को कृषि की और मज़दूर को मज़दूरी की डिग्री चाहिए? क्या मंत्रालयों को हर क्षेत्र के उद्योगपतियों या जानकार को दे देना चाहिए?

फिर सवाल ये है कि राजनेता हों कौन? भारत के उस अस्सी प्रतिशत से ज़्यादा जनता का क्या जो बारहवीं कर के रुक जाती है? डिग्री लेकर कौन सा झंडा गाड़ दिया है?

अगर कल ये संशोधन हो जाए कि सांसद या विधायक बनने के लिए पीएचडी की ज़रूरत होगी तो मैं दावे के साथ कहता हूँ कि अगले चुनाव होने तक हर सांसद अलग अलग काॅलेज़ से डिग्री ले आएगा। ये बात छुपी नहीं है कि हमारे यहाँ डिग्रियाँ बिकती हैं।

हमें शर्म आनी चाहिए कि हमें अपने संविधान का ही ज्ञान नहीं है। जब हर मंत्रालय में सेक्रेटेरी लेवल के लोग हैं जो उस क्षेत्र में ही काम कर रहे हैं तो मंत्री की कितनी अहमियत होगी? मंत्री जनता की आशाएँ लेकर जाता है और कोई तानाशाही नहीं है कि वो अड़ जाए कि यही होगा।

हर बात आज जनता के समक्ष है। एक ग़लत बयान पर चौबीस घंटे कुतर्क कराने वाली मीडिया है जो सबको उत्तरदायित्व बोध कराती रहती है भले उसे अपना ख़ुद ही ना हो!

और ये सारी संकीर्णता तब जबकि सरकार का पहला दिन हो। फिर उमा भारती जी सोनिया गाँधी की डिग्री माँगने लगी। इसी पार्टी ने विदेशी मूल का भी मुद्दा उठाया था।

कुल मिलाकर सब मटियामेच करने के चक्कर में हैं। मोदी बाद में क्या करेंगे या पहले क्या किया ये अलग विषय है पर उसे कुछ करने तो दो। एक दिन में जितना होना था उस हिसाब से मोदी आगे चल रहें हैं। लेकिन ये गारंटी किसी को नहीं लेना चाहिए कि भविष्य में क्या हो जाएगा।

Advertisements

Did you like the post, how about giving your views...

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s