Crisis in Iraq: अमेरिका के मानवाधिकारों वाला झंडा कहाँ है?

इराक़ में शिया और सुन्नी की लड़ाई चल रही है और स्थिति काफ़ी घटिया है। अमेरिका जो कि फुस्स बात पर ‘मानवीय अधिकारों के हनन’ की दलील देता अपनी सेना तेल संपन्न देश में पहुँचा देता था, आज चुप है।

क्यों चुप है भगवान जाने! सीरिया में जो हाल है वो वहीं के लोग जानते हैं और हम तब तक कुछ नहीं जानते जब तक दलाली करने वाली हमारी या विदेशी मीडिया हम तक ना पहुँचाए। सीरिया में दसियों हज़ार लोग मर गए तब अमेरिका सीरिया की आड़ में इरान को निपटाने की फ़िराक़ में था क्योंकि वहाँ तेल बहुत है। पर इरान के न्यूकिलियर होने की धमकी पर उसकी हिम्मत ने वैसे ही जवाब दे दिया जैसे कि उत्तरी कोरिया के धमकाने पर अक्सर होता है।

अब सवाल है कि वो मानवीय मूल्यों का झंडोत्तोलन करने वाला अमेरिका और उसकी चाटने वाले मानवता के संरक्षक देश इराक़ के लिए क्या कर रहे हैं जबकि इराक़ की इस स्थिति के लिए सिर्फ़ वही ज़िम्मेदार हैं। उनका झंडा कहाँ खो गया? या तमाम स्पोक्सपर्सन की माईकें किसी ने छीन लीं?

आज सीएनएन और वाशिंगटन पोस्ट इराक़ की चर्चा और विश्व में बढ़ते अराजकता और दहशतगर्दी पर स्पेशल नहीं निकाल रहा। क्यों नहीं निकाल रहा! क्योंकि इन ‘स्वतंत्र’ और देशभक्त मीडिया के दलालों को व्हाईट हाउस से निर्देश नहीं आया होगा।

और चूँकि अभी भारत में बलात्कारों के दौर के बाद ‘मारकर पेड़ से लटकाया’ टाईप का न्यूज़ फ़ैशन में है तो भारतीय मीडिया सीधे-सीधे कह रही है ‘भाँड़ में जाए दुनिया, हम बजाएँ हरमुनिया’। उसे अभी कुछ नहीं चाहिए, विदेशी कुछ लिखेंगे तो हम भी बेल्ट लगाकर, बटन टाँक कर कुछ छाप ही देंगे।

आज इराक़ ने अमेरिका से गुहार लगाई है कि वो हवाई हमला कर के इन आतंकियों से निजात दिलाए। हम या आप सिर्फ़ सोच सकते हैं कि किस परिस्थिति में एक देश ख़ुद अपनी ज़मीन पर विदेशी विमानों से हमला करवाना चाहता है!

इराक़ या अफ़ग़ानिस्तान में जो भयावह स्थिति बनी हुई है वह सिर्फ़ और सिर्फ़ बुश के महात्वाकांक्षी और ‘ईगो-मसाज़’ का परिणाम है। दोनों ही देश में सरकार गृहयुद्ध जैसी स्थिति में है और अपने ही नागरिकों को मारने की योजना बनाती है।

सवाल है की मानवीयता का मुखौटा लगाने वाला अमेरिका इन देशों में ऐसा क्या कर आता है कि ये पहले से ज़्यादा बुरी हालत में पहुँच जाते हैं? अमेरिका को आज मानवता क्या इसीलिए याद नहीं आ रही कि कोई अमेरिकी नागरिक बंदी नहीं बना अब तक?

या, क्या इराक़ के तेल के कूएँ सूख गए हैं?

#IraqCrisis #CrisisInIraq #USinIraq

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