श्री राधे माँ के पक्ष में 

कामसूत्र, भक्तिकाल के बाद बने मंदिर और गुफ़ाओं की कलाकृतियों के बाद हमारे हिंदू, या सनातन, धर्म से ‘सेक्स’ गायब ही हो गया था।

आई मीन देयर वॉज़ नो सेक्स एट ऑल लेफ़्ट इन हिंदू वे ऑफ़ वरशिप।

एंटर सेक्स क्रेविंग गुरूज़… एण्ड लिबरेटेड, डान्सिंग घर्मगुरू श्री राधे माँ…

ओह या… या बेबी… यू हर्ड इट राईट… आँ-आँ…

सेक्स को तो सेलिब्रेट किया गया है और जितनी स्वतंत्रता से सेक्स पर चर्चा हमने की है उतनी कहीं नहीं हुई। ग्रंथ लिख दिए गए, गुफ़ाओं में, मंदिरों में बीस बीस साल तक कलाकृतियाँ बनती रहीं।

खैर वो तो भूतकाल है। वर्तमान में सेक्स को हमारे गुरूओं ने लिटरली ले लिया है। मतलब ये कि, उस पर चर्चा नहीं करते, बस करने लगते हैं। आसाराम, नित्यानंद, सत्य साईं बाबा (हेल या, उन पर भी प्रसाद देने के आरोप बराबर लगे हैं) आदि उदाहरण हैं।

बाकी तो तांत्रिक लोग प्रसाद के रूप में बच्चे तो पैदा कराते ही रहते हैं। 

कल से एक बहुत ही सुंदर धर्मगुरू देवी श्री राधे माँ के ऊपर सोशल मीडिया में चर्चा हो रही है। राधे में लिप्स्टिक वग़ैरह लगाकर प्रवचन करने आती हैं और भक्तगण गोद में भी उन्हें उठा लेते हैं।

जैसा कि ज्ञात है कि हमने पूजा करने के तरीके या कितनी बार करना है, कैसे करना है, किसकी पूजा करनी है कभी भी नहीं बताया। जिसको जैसे, जिस किसी देवता की, जितनी बार पूजा करनी हो करे। 

कल राधे माँ ने अपनी कुछ फोटो मिनी स्कर्ट में सोशल मीडिया पर डाल दी। राधे माँ प्रवचन करती हैं, भक्ति में तल्लीन होकर दुःखियों की सेवा करती हैं। अब इसका मतलब ये तो नहीं कि वो तमाम समय बस लाल साड़ी पहन कर चलती रहे, बाहर ना जाए, लोगों से ना मिले, शॉपिंग ना करे!

द हेल मैन! तुम कॉरपोरेट की ग़ुलामी करते हो शर्ट-पैंट में और गरमियों में भी टाई लगाकर जाते हो तो क्या ऑफिस के बाद पजामा पहनकर बिना अंडरवेयर के सब्ज़ी ख़रीदने नहीं जाते? साले ज़रूर जाते हो, हमने देखा है, बहुत बार देखा है। 

तो क्या एक धर्मगुरू, जो कि एक महिला है उसे मिनी स्कर्ट पहनने की आजादी नहीं है? और बहुत सुंदर है, मिनी स्कर्ट में भी सुंदर लगती है। किसी का रेप तो नहीं कर दिया उन्होंने! या मिनी स्कर्ट पहनने के बाद प्रवचन में गलत बातें तो नहीं सिखाने लगीं? मिनी स्कर्ट ही पहना है किसी का कार्टून नहीं बना दिया कि रॉकेट लॉन्चर लेकर पहुँच जाएँ धर्म रक्षा हेतु।

मैं सीरियस हूँ। नो किडिंग हेयर। धर्मोपदेश देना एक पेशा है। जब तक राधे माँ ये काम कर रही हैं और कुछ ग़ैरक़ानूनी नहीं करती, मैं उनके सपोर्ट में हूँ। 

बोलो राधे राधे

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