अनस्ट्रैपिंग द ब्रा जस्ट टू क्विक: कोई लिमिट है इस ब्राँड के फ़ेमिनिज़्म की?

जसलीन कौर तो याद ही होगी आप सबको। और आप में से अधिकतर को खुद के धोती और ब्रा स्ट्रैप खोलकर फ़ेमिनिज़्म का नारा लगाकर कूद जाने का वाक़या भी याद होगा। कितनी स्वतंत्रता, कितना अभिमान, कितना न्यायप्रिय होने का भाव आपके अंदर जगा होगा! ‘परवर्ट’ को ‘नेम एण्ड शेम’ कर दिया। वाह!

एक क़ानूनी बात बताता हूँ। सबसे पहला रूल ये है कि जब तक किसी का दोष साबित नहीं हो जाता वो निर्दोष होते हैं। दूसरा रूल ये है कि इन जैसे हालात में ना तो विक्टिम का, ना ही अक्यूज्ड का नाम बाहर किया जाता है। सीधी सी बात है कि आपके अनस्ट्रैप होने में समय तो लगता नहीं और किसी का जीवन आप अफेक्टिवली ख़त्म कर देते हैं।

और तीसरी बात है कि ‘इग्नोरेंस ऑफ़ लॉ ईज़ नो एक्सक्यूज़’। लेकिन आपको क्या फ़र्क़ पड़ता है। आपकी तो पूरी जिंदगी झूठी बातों पर, फर्जी लाईक्स पर और चार डकफेस सेल्फी पर आने वाले ‘वॉव, यू लुक हॉट बिच’ पर चलती है। तुम्हारी ऑपिनियन फेसबुक के इमेज पर ब्लैक एण्ड व्हाईट में लिखे दो लाईन पर निर्भर है। भेड़चाल की मल्लिका हैं आप जिसके लिए जिंदगी का सबसे बड़ा अचीवमेंट एक फोटो पर तीन सौ लाईक आना है। इस फोटो के कमेंट में तुम्हें चाहे कोई ‘बिच’ यानी कुतिया कहे, ‘माल’ कहे, आईटम कहे, इन सब में तुम्हारी ऑब्जेक्टिफिकेशन वाली विचारधारा वाष्पीकृत हो जाती है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि इस देश में और दुनिया में स्त्रियों पर तरह तरह के अत्याचार होते हैं। कई जगह तो पंचायतों के द्वारा बलात्कार करवाया जाता है। नंगे परेड करवाना, ख़ास कपड़े पहनने की मनाही, फोन पर बात करने की मनाही, पीरीयड्स में अलग-थलग छोड़ देना, घरेलू हिंसा आदि आदि उन तमाम बातों में से हैं जिसने दुनिया भर में नारी होने की सामूहिक चेतना को हिला कर रख दिया है।

लेकिन जेंडर डिस्क्रिमिनेशन का बैलेसिंग एक्ट इन जसलीनों और निप्पल-शो तक लिमिटेड फेमिनिस्टों के इस तरीके से नहीं होना चाहिए। फिर तुममें और तुम्हारे दुपट्टे खींच कर भाग जाने वाले में क्या अंतर है? सरबजीत तो नंगा घूम रहा है अपनी इज्जत गवाँकर। उसका दुपट्टा तो तुम्हारे ब्राँड के फ़ेमिनिज़्म ने खींचा है! क्या तुम उससे माफ़ी माँगने को तैयार हो?

मीडिया तो माफ़ी नहीं माँगेगा। मीडिया सिर्फ स्पेलिंग मिस्टेक की माफ़ी माँगता है। आजकल वो भी बंद है क्योंकि मार्केटिंग वाले कहते हैं कि इमेज़ खराब होता है। कुछ लोग गलत ही पढ़ेंगे तो किया हो जाएगा! 

लेकिन इस मीडिया में तुम्हारा अपना भी एक मीडिया है, सोशल मीडिया। इसी जगह पर तुमने लिप्स्टिक की गहरी लाली के साथ किसी के कैरेक्टर को किस ऑफ़ डेथ दे दिया। क्या तुममें इतनी हिम्मत है कि एक पोस्ट लिखकर पब्लिकली माफ़ी माँग सको सरबजीत से और उसके जैसे हजारों लड़कों से जो किसी लड़की की पर्सनल खुन्नस के चक्कर में अपना सबकुछ खो देते हैं।

हम तो आप पर होने वाले सारे अत्याचारों पर पूरे पुरुष समाज की तरफ से माफ़ी ही नहीं माँगते, यहाँ तक कहते हैं कि उसके पुरुष होने पर हमें लज्जा है। किसी और के अपराध पर खुद को शर्मसार महसूस करते हैं और बिना पूछे माफ़ी माँगते हैं तुम सबसे जो हमारी दोस्त हो, चाहे मैं तुमसे कही मिला या नहीं। सिर्फ ये कहने के लिए कि इस लड़ाई में हम तुम्हारे साथ खड़े हैं।

मैं आज तुम सबसे, जिसने सरबजीत को घटिया, नीच और बेगैरत करार दिया है बिना दूसरा पक्ष जाने, पूछता हूँ कि क्या तुम माफ़ी माँगते हो? क्या तुम मेरे साथ इस मुहिम में हो जहाँ एक लड़का सिर्फ लड़का होने के लिए मानसिक यातना झेलने को मजबूर हो रहा है?

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