रोहित वेमुला: जब डिबेट ट्रॉलिंग और नीचा दिखाने तक सिमट जाए

सोशल मीडिया का दुर्भाग्य यही कि लोग जिंदगी भर मुख्य समस्या को छोड़कर उस पर बन रहे ट्रॉल को ही ज्यादा तरजीह देते रहेंगे।

रोहित वेमुला मर चुका है। क्यों मरा उससे ज्यादा महत्वपूर्ण उसका दलित होना है, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण हमारे नेताओं का मूर्खतापूर्ण बयान है, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है किसी के द्वारा इसमें गाय और आदमी में से ज्यादा सुरक्षित कौन है ले आना, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है इसमें मोदी कहीं से डाला जा सकता है कि नहीं…

पढ़े लिखे होकर चूतिया क्यों बन रहे हो? एक छात्र आत्महत्या कर लेता है और तुम्हें उसमें उसका दलित होना, गाय, भैंस, मोदी, नेता दिख रहा है?

डूब के मर जाओ। तुम्हारा उद्देश्य इस पर विमर्श का नहीं है, तुम्हारा उद्देश्य है कि किस तरह से इस मौत का उपयोग करके किसी को नीचा दिखाया जाय।

फिर ये भी जान लो कि उसके मरने का और आगे उस जैसे के मरने में तुम्हारा बहुत बड़ा हाथ है क्योंकि तुमने उसकी मौत के कारण पर बात नहीं की थी, तुमने गाय खोजा था, तुमने उसके दलित होने का फ़ुटबॉल बनाया था, तुमने उसमें मोदी डाला था, तुमने उसमें हिंदुओं को ठूँस दिया था।

तुमने ये नहीं देखा कि विश्वविद्यालयों में वाईस चांसलर और मैनेजमेंट क्या कर रहा है और छात्र सड़कों पर क्यों हैं। मुझे यक़ीन है कि आपके पूरे ज्ञान का श्रोत भी फेसबुक पर चल रहे ज्ञानपुंजों के चार ट्रॉल और स्टेटस ही होंगे।

ऐसे ही गलत तर्कों से लड़ोगे तो तुम ना मोदी को गिरा पाओगे, ना अतिवादी हिंदुओं को वैसे ही जैसे कि आतंकवाद का सारा डिबेट दाढीवालों तक सीमित हो गया है। तर्क सही उठाओ और सिर्फ शेयर मत करो, अपने विचार दो, उस पर लिखो, सवाल करो।

मज़े लेना बंद करो क्योंकि कोई मर गया है।

#HyderabadUniversity #RohitVemula #Rohith

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