फ़्लाइओवर ज़मीन पर: कुछ मौतें अनाथ होती हैं

बाइस लोग मरे हैं, बीस से ऊपर लापता हैं और घायल तो सन्नी देओल की फिल्म भी है, इसीलिए उसपर नहीं जाएँगे। लापता लोग भी मर ही जाते हैं, खाली उनकी गिनती अभी इस कॉलम में है, बाद में उस कॉलम में हो जाएगी और फिर कोई विकिपीडिया पर अपडेट कर देगा और साल भर बाद हम पढ़ेंगे, “सरकारी आँकड़ों के हिसाब से कुल बयालीस मरे।”

वैसे आँकड़ों से होता जाता कुछ नहीं है। ये सब एक्ट ऑफ़ गॉड है, और गॉड तो क्रिश्चियन हैं! ये कोई कविता नहीं कर रहा मैं। मेरे शब्दों की उदासीनता उस सरकारी उदासीनता को बयान करती है जहाँ मौतों का मुआवज़ा बनता है, घायलों को रूपये मिलते हैं और दब कर मरे हुए की परवाह किसी को नहीं होती। परवाह तो मुझे भी नहीं है। लोग रोज मरते हैं। फ़िल्टर लगा लेते हैं हम और हैशटैग ट्रेंड करा देते हैं। अब तो ये भी पुराना हो गया है। फेसबुक अब फ़िल्टर भी नहीं बनाता। फ़िल्टर खाली सिगरेट में रह गया है। एक फ़िल्टर हमारे सरकार के दिमाग के भी ऊपर लगा होगा। हमको ऐसा लगता है, क्यों लगता है मालूम नहीं।

ये कमाल की बात नहीं है कि एक फ़्लाइओवर जमीन पर गिर जाता है वो भी तब जब शहर जग रहा हो। हमारे ऊपर एक चिड़िया बीच कर देती है तो लगता है बाप रे क्या गिर गया, और किसी के ऊपर फ़्लाइओवर गिर गया… सोच कर ही मन खिन्न हो जाता है। तस्वीरें ऐसी कि किसको गाली दी जाए, किसे बद्दुआएँ दें ये तक डिसाइड नहीं कर पाते।

कोई कह रहा है डिज़ाइन में दिक्कत थी, कोई कन्स्ट्रक्शन को खराब बता रहा है, कोई ममता दीदी के इलेक्शन के कारण जल्दबाज़ी में एक चौथाई फ्लाईओवर का काम चार महीने में पूरा कराने के दवाब को, तो कोई ‘दोषी छोड़े नहीं जाएँगे’ का उद्घोष कर रहे हैं। पहले पकड़ लो दोषियों को फिर छोड़ने ना छोड़ने की बातें होती रहेंगी।

कुछ साल पहले ही एक आग लगी थी ममता दीदी के राज्य के हस्पताल में, 90 लोग मरे थे, तुरंत लाइसेंस रद्द कर दिया गया था और ‘दोषी को छोड़ा नहीं गया था।’ कोई कोलकाता का है तो वो जानता है उस AMRI के बारे में कि अभी वहाँ क्या चल रहा है। फ़ॉग के साथ साथ 2014 से हस्पताल चल रहा है, लेकिन हाँ दोषी छोड़े नहीं जाएँगे।

लेकिन दोषी कौन है पता है? दोषी है वो आदमी जो फ़्लाइओवर के नीचे से जा रहा था। जब फ़्लाइओवर बनवाया है तो ऊपर से जाइए, और फ़्लाई करते हुए जाइए… लेकिन नहीं! थर्ड वर्ल्ड के बेगैरत, नासमझ, मूर्खों की तरह उसके नीचे से ही जाएँगे। जाइएगा तो जो चीज़ ऊपर है वो तो नीचे आएगी ही, न्यूटन ने भी गुरूत्वाकर्षण के सिद्धांत में समझाया है। 

लेकिन नहीं समझेंगे आप। खाली ममता दीदी को कोसेंगे! उनके नाम में ही दीदी है, कोई दीदी क्या अपने छोटे भाइ-बहन के लिए कोई चीज नेग्लेक्ट कर सकती है? क़तई नहीं। दीदी इलेक्शन में बिजी हैं और ये साले गरीब, नालायक, मिडिल क्लास के छोटी कार वाले इसी टाइम में फ़्लाइओवर नीचे खींच के मर गए।

बेगैरत! 

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