तलाक़, तलाक़, तलाक़ के क़ानून को तलाक़ देने का समय

दो दिन पहले असम में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को काँग्रेस की जगह भाजपा को वोट करने पर इस्लाम के ‘तलाक़, तलाक़, तलाक़’ के क़ानून का प्रयोग करते हुए तलाक़ दे दिया।

तीन बार तलाक़ और कुछ नहीं बस विशुद्ध मूर्खता है। इसको किसी भी तरह से जस्टिफाइ करने वाले भी आले दर्जे के पाखण्डी ही हैं। समय के साथ साथ समाज और इस तरह के पागलपन वाले क़ानूनों को बदलना नहीं बल्कि फाड़कर उन किताबों से फेंक देना चाहिए जहाँ ये बसते हैं।

मैं यूनिवर्सल सिविल कोड के डिबेट में नहीं जाऊँगा। एक समाज को, अगर आगे बढ़ना है तो, परंम्पराओं को जो एक वर्ग या लिंग विशेष के पक्ष में गलत तरीके से झुकी हुई हो, उसे नकारते रहना होगा। यहाँ मैं सिर्फ इस ‘तलाक़ के सवाल पर लिख रहा हूँ इसीलिए ‘व्हाट अबाउट दिस एण्ड दैट’ ना करें। 

ज़रा सोचिए कि आपकी बहन को किसी पगलेट ने इस परम्परा का इस्तेमाल करके तीन बार तलाक़ कह कर घर से बाहर कर दिया, फिर क्या आप पाँच बार नमाज अदा करके इस्लाम के इस क़ानून का धन्यवाद ज्ञापन करेंगे या फिर इस पर सोचेंगे कि ये अस्तित्व में है ही क्यों?

धर्म पत्थर की लकीर नहीं होती, धर्म स्वच्छ पानी की नदी है। जब वो उद्गम को छोड़ती है तो बिल्कुल साफ़ रहती है। वो बहती रहती है। बाद में उसमें कूड़ा भी फेंका जाता है और वो जड़ी-बूटियों को सहलाती हुई भी चलती है। कूड़ा एक समय के बाद तली में बैठ जाता है या फिर कोई उसे बाहर फेंक देता है। और जड़ी-बूटियों की अच्छाई उस पानी में पहुँचकर, उसे पीने वाले के लिए स्वास्थ्यवर्धक बनाती है।

यही पानी इस्लाम है, हिंदू है, ईसाई है, सिख है… इसमें पड़े कचड़े को फेंकने का काम हमारा और आपका है। नहीं फेंकिएगा तो चलते हुए किसी दिन इसी नदी के किनारे पड़ने वाले आपके ही गाँव में पहुँचेगी जहाँ आपका ही कोई सम्बंधी इसे पीएगा और उस कचड़ा-मिश्रित सोच का इस्तेमाल करते हुए तीन बार तलाक़ कहेगा और आप कुछ नहीं कर पाएँगे। क्योंकि ये पानी आपके सामने से होकर वहाँ तक पहुँची और आपने कुछ नहीं किया।

ये कचड़ा बोर्ड और मुल्लों के हाथ मत छोड़िए। मुल्ले, पंडित, पादरी ही सबसे ख़तरनाक हैं धर्म की नदी के लिए। इन्होंने अपना कुआँ खोद रखा है, लेकिन समाज को नदी से पिलाते हैं। उनको साफ़ करने में कोई रूचि नहीं है। नदी आपकी है, तलाक़ जैसे कचड़े को आप ही को निकालना है।

Advertisements

Did you like the post, how about giving your views...

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s