मीडिया, माता सोनिया और ऑगस्टा वैस्टलैंड

गौ माता के बाद अगर इस देश में कुछ सेकरेड टाइप का है, तो वो हैं माता सोनिया। माता सोनिया तो माता तभी हो गईं थीं जब उन्होंने ‘अंतरात्मा की आवाज़’ सुनकर प्रधानमंत्री की कुर्सी ‘ठुकराई’ थी। आज फिर से ज़रूरत है माता जी को अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनने का।

इटली ने उनलोगों को जेल में बंद कर दिया है जिन्होंने इस करोड़ों के हेलिकॉप्टर सौदे में भारतीय नेताओं (उस समय की सरकार से) और मीडिया के कई लोगों को ‘किकबैक्स’, या सीधे शब्दों में कहें तो घूस, दिए थे। वैसे तो हम बाहर के देशों में हुए मैगी के टेस्ट रिजल्ट्स पर बवाल काट देते हैं कि ‘विदेश’ में कह रहा है तो ज़्यादा ठीक होगा, लेकिन आजकल वो बवाल इस मुद्दे पर ना तो आम जनता, ना ही मीडिया उठा रही है।

और तो और, पहले तीन दिन चुप रहने के बाद, और माता सोनिया के ‘मैं किसी से नहीं डरती’ के बाद, भारत के सबसे ईमानदार नेता माननीय अरविंद केजरीवाल ने भी भाजपा को ‘आइ डेयर’ लिखा है। हाँ ये बात अलग है कि शीला दीक्षित के नाम की दो सौ पेज की फ़ाइल के सारे पन्ने उनके ईमानदारी की हवा में उड़ गए या फिर उनके तेज में जल गए।

बहरहाल, दो बातें सामने हैं कि डील हुई थी और मनमोहन सरकार के समय ही हुई थी। डील में धूस देने वाले पकड़े जा चुके हैं लेकिन घूस लेने वाले का अता पता नहीं है।

जिसको पूछो वो दूसरे का नाम बता देता है कि वो जवाब देंगे। और जब केजरीवाल जवाब माँग रहे हों तो जवाब ज़रूरी है क्योंकि चाइना ने भी उनके ‘ऑड-इवन’ को सराहा है। ये बात अलग है कि दिल्ली की ही संस्था ने प्रदूषण का लेवल गिरता नहीं देखा।

प्रदूषण का स्तर दिमाग़ी हो गया है। अब देखिए कि इतनी बड़ी ख़बर है और हमारे मीडिया के मठाधीशों से लेकर और ‘ये अँधेरा ही आज के टीवी की तस्वीर है’ करने वाले लोग ग़ायब है। वो प्राइम टाइम में नहीं हैं। दुर्भाग्य ये है कि बेचारे राजदीप को कुछ नहीं सूझा तो ऑगस्टा वैस्टलैंड के समक्ष भाजपा द्वारा किया कोई GPSC स्कैम की बात कर दी। आपने नहीं सुना होगा ये नाम शायद। मैंने भी नहीं सुना।

पहले तो काँग्रेस द्वारा ख़रीदी मीडिया चुप रही। फिर जब इटली की एक पत्रकार ने ‘मिसेज़ गाँधी’ का नाम लिया तो मोहतरमा राजदान जी की आवाज़ लड़खड़ाने लगी। लड़खड़ा तो पूरा तंत्र जाना चाहिए, लेकिन देखते हैं कि इसमें बात कहाँ तक होती है।

काँग्रेस के काल में घोटाले इतने हुए हैं कि सलमान ख़ुर्शीद वाला वो बयान याद आ जाता है कि घोटाला ही करना होगा तो क्या इतने कम का करेंगे! वही बात है कि ये तो ‘घूस’ है। और घूस शब्द जब हम सुनते हैं तो वही अपना काम कराने के लिए किसी चपरासी को पचास रूपये देना, या फिर ट्रैफ़िक पुलिस को सौ का नोट पकड़ाकर आगे बढ़ना हो जाता है।

लेकिन करोड़ों की बात है। लोग पकड़े जा चुके हैं। गौ माता को तो इस देश में लोग काटकर सड़कों पर खाने की आज़ादी माँगते फिर रहे हैं। फिर तो ये माता सोनिया ही हैं। चालीस सीट पर पार्टी सिमट गई है। जो बचे हैं वो जेल जाएँगे कि संसद, ये पता नहीं चल रहा।

लेकिन हाँ, अंधेरे को इस दौर की सच्चाई बताने वाले पत्रकारों से उम्मीद है कि मोमबत्ती लिए उसी तरह बाहर आएँगे, उसी कन्विक्शन के साथ जैसा कि वो अख़लाक़ पर आए थे, स्मृति ईरानी पर आए थे, पठानकोट पर आए थे, बंगाल के टूटे पुल पर मोदी के संवेदनहीन भाषण पर आए थे।

राजदीपों, रवीशों, बरखाओं, राजदानों आदि से उम्मीद है कि अपनी जमात के उन लोगों के नाम ‘फ़ील्ड में जाकर काम’ करते हुए हम तक पहुँचाएँ जिन्होंने पूरा मीडिया का सीन ‘मैनेज’ किया था। सोनिया की गिरफ़्तारी से ज़्यादा ज़रूरी इन बिके हुए पत्रकारों की है जिन्होंने हर बार जनता को निष्पक्षता के नाम की मोमबत्ती दिखाकर देश में इमर्जेंसी की स्थिति बताने की कोशिश की है।

केजरीवाल जी ने तो अपना काम कर दिया ट्वीट करके और मुझे पता है कि अगर वो प्रधानमंत्री होते तो माता सोनिया को आज के आज उसी बैरक में बंद कर देते जहाँ उन्होंने शीला दिक्षित को बंद कर रखा है।

अब आप लोग भी टाइ उतारिए और अपने आकाओं का नाम लीजिए।

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