सोशल कॉप्स द्वारा दिल्ली में प्रदूषण जाँचने का सस्ता, आसान तरीक़ा

हमारी एक जानकार हैं प्रकल्पा, जिनसे मैं 2013 में मिला था जागृति यात्रा के बारे में लोगों को समझाने के सिलसिले में। सिंगापुर से पढ़ी और गोल्डमैन साक्स में नौकरी करती हुई प्रकल्पा ने दिल्ली में अपना स्टार्ट अप शुरू करने का फ़ैसला किया।

सोशल कॉप्स नामक यह स्टार्ट अप लगभग ६०० सूत्रों से कम दाम वाले फ़ोन के ज़रिये तरह तरह के आँकड़े एकत्र करता है। ये आँकड़े, भारत के किस हिस्से में बिजली है, शौचालय काम करता है, पानी गंदा है से लेकर आपके पड़ोस में कूड़ेदान है कि नहीं तक के बारे में बताते हैं।

इन आँकड़ो का क्या काम होता है? आँकड़ो से सरकारें अपनी योजनाएँ बनाती हैं। और परंपरागत आँकड़े लेने के तरीक़े पुराने और नाकाम हो चुके हैं। इस समय जिस के पास आँकड़ा है, वो बेहतर स्तिथि में है।

फ़िलहाल सोशल कॉप्स की टीम ने एक बेहतरीन प्रयोग शुरू किया है दिल्ली में। ये तो आप सुनकर पक गए होंगे कि दिल्ली सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहर है। केजरीवाल जी ने ऑड-इवन भी शुरू किया लेकिन दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के हिसाब से वो कम होता नहीं दिख रहा।

सोशल कॉप्स के अनुसार पूरी दिल्ली में, जहाँ लगभग दो करोड़ लोग रहते हैं, सिर्फ़ छः स्टेशन हैं प्रदूषण जाँचने के लिए। इन प्रत्येक स्टेशन का सरकारी ख़र्च लगभग १.१ करोड़ रुपये है। इनकी दिक़्क़त ये है कि ये एक ही जगह पर, हर रोज़, एक ही समय पर प्रदूषण का आँकड़ा भेजते रहते हैं। इससे सही तस्वीर सामने नहीं आती। और चूँकि महँगा है तो आप हर जगह लगा भी नहीं सकते।

imageयहीं पर सोशल कॉप्स का ये सटीक आइडिया काम में आता है। इन्होंने इस समस्या को समझा कि आँकड़े एक ही जगह से, एक ही समय में हर रोज़ नहीं आने चाहिए बल्कि पूरी दिल्ली कवर होनी चाहिए। इसके लिए इन्हें जाँचने वाला डिवाइस भी मोबाइल बनाना पड़ा।

मज़े की बात ये है कि इन्होंने मात्र ६५०० रूपये में एक डिवाइस बनाकर, जो कि वही एक करोड़ वाले डिवाइस का काम करता है, पाँच ऑटोरिक्शा में लगा दिया। इसका मतलब ये है कि ये ऑटोरिक्शा पूरी दिल्ली में जहाँ जहाँ जाएँगे, उसके हर लोकेशन के प्रदूषण का आँकड़ा हर तीस सेंकेंड में इनके सर्वर पर भेजा जाता रहेगा।

imageहै ना कमाल? और ये सारी जानकारी और आँकड़े आप इनके वेबसाइट https://delhiair.socialcops.com/dashboard पर रियलटाइम में देख सकते हैं।

ये जानकारी मुफ़्त में जनता के लिए उपलब्ध है। आप यहाँ से हर ऑटोरिक्शा की मूवमेंट ट्रैक कर सकते हैं, इन जगहों की हवा की गुणवत्ता (एयर क्वालिटी) और उसमें प्रदूषण का स्तर हर घंटे और हर दिन के हिसाब से देख सकते हैं।

इससे होगा क्या? इससे ये होगा कि अगर केजरीवाल चाहें तो वो इन आँकड़ों का प्रयोग करके ऑड-इवन की जगह कुछ और योजना ला सकते हैं। क्योंकि अब ये पता चल पाएगा कि कौन या जगह में ज़्यादा प्रदूषण है, किस समय ज़्यादा प्रदूषण है। जब आँकड़े ज़्यादा होंगे तो ज़ाहिर है कि पॉलिसी बनाने में बेहतर मदद मिलेगी।

प्रकल्पा और सोशल कॉप्स की पूरी टीम को इस प्रयोग के लिए बधाई और आशा है कि ये सफल रहे और सरकारें उनके बाक़ी के आँकड़े और प्रोजेक्ट्स का फ़ायदा उठाकर अपनी योजनाओं को बेहतर तरीक़े से क्रियान्वित करे।

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