‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए बम फोड़ने वाले आतंकी क्या वाक़ई किसी धर्म के नहीं होते?

मुसलमानों का सबसे पवित्र महीना चल रहा है। ये पूरा महीना संयम और आत्म-नियंत्रण के लिए होता है जब रोजेदार मुसलमान मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्तर पर एक कठिन दिनचर्या जीते हैं ताकि उनकी पूरे शरीर के हर तरह के अवसाद बाहर निकल जाएँ।

भारत में तो अभी तक ये महीना सुकून से बीत रहा है पर ओरलैंडो, ढाका, काबुल और इस्तांबुल समेत लगभग सौ जगहों पर आइसिस (या इस्लामिक आतंकियों) द्वारा 175 से ज्यादा आतंकी हमले हो चुके हैं। अगर विस्तार से पढ़ना है तो यहाँ पढिए: जून 2016 में हुए आतंकी हमले

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ये कोई छिपी बात नहीं है कि आज पूरी दुनिया के लिए नासूर बन चुके आइसिस (इस्लामिक स्टेट) के झंडे पर अल्लाहु अकबर लिखा है। ना ही ये बात छिपी है कि कल हुए ढाका वाले आतंकी हमले में हमलावर ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्ला रहा था। ये भी सबको याद होगा कि पेरिस के शार्ली एब्दो के कार्यालय पर हुए हमले में आतंकी किस धर्म का नारा बुलंद कर रहे थे।

लेकिन इसका मतलब ये क़तई नहीं है कि सारे आतंकी हमले मुसलमान कर रहे हैं, या सारे मुसलमान आतंकवादी हैं। जी नहीं। अगर आप इन आतंकियों की संख्या और मुसलमानों की संख्या का प्रतिशत निकालेंगे तो पाएँगे कि ये सिरफिरे आतंकी मुट्ठी भर हैं।

सिर्फ इराक़ में आइसिस वालों ने अभी तक 1,70,000 से ज्यादा शिया मुसलमानों को मार दिया है। ये कैसे इस्लाम को आगे ले जा रहे हैं मुसलमानों को ही मार कर! आज शिया को मार रहे हैं, कल कहेंगे कि जो उनके हिसाब से नहीं चल रहा उनको मार डालो चाहे वो सुन्नी ही क्यों ना हो। सत्ता का लोभ और धर्मांधन्ता ही इस ‘इस्लामी आतंक’ की जड़ में है जो कैंसर की तरह इस्लाम को बर्बाद करने पर तुली हुई है।

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आइसिस को इस्लामिक स्टेट चाहिए, वो पूरी दुनिया में ख़िलाफ़त लाना चाहता है। मान लीजिए कि पूरी दुनिया पर ख़िलाफ़त आ भी जाए तो क्या इस ख़िलाफ़त के ख़लीफ़ा लोकतांत्रिक तरीक़े से चुने जाएँगे? क्या एक आम मुसलमान, जो बहुत ही पाक-साफ़ है, वो ख़लीफ़ा बनेगा? या फिर वो जिसके हाथ हज़ारों बच्चों की हत्या के ख़ून से रंगे हैं? या कहीं वो तो ख़लीफ़ा नहीं बन जाएगा जिन्होंने हज़ारों लड़कियों का बलात्कार करवाया और सैकड़ों का बलात्कार किया और मारकर फेंक दिया?

क्या ब्रुसेल्स, पेरिस, ढाका, काबुल, इंसतांबुल, पाकिस्तान, इराक़, ब्रिटेन, अमेरिका आदि में ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा बुलंद करके हज़ारों को मौत के घाट उतारने वाले इस्लामिक स्टेट के ख़लीफ़ा और उनके वज़ीर होंगे?
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आतंक का धर्म तो नहीं होता पर आतंकियों का धर्म ज़रूर होता है। ये हर आतंकी हमले के बाद और भी खुलकर सामने आता है। जो लोग इस सत्य को नहीं स्वीकार रहे वो डिनायल में जी रहे हैं। हर आतंकी धर्म के नाम पर ख़ुद को आत्मघाती हमले में उड़ा रहा है। हर आतंकी धर्म के नाम पर दुकानों, स्कूलों, सिनेमा हॉलों में गोलियाँ बरसाता फिर रहा है।

और हम-आप पोलिटिकली करेक्ट होने के चक्कर में ‘इनका कड़ा जवाब दिया जाएगा’ और ‘आतंक का कोई धर्म नहीं होता’ कहकर बयान जारी कर देते हैं।

आज अच्छे मुसलमानों को इन सिरफिरे, धर्मांधन्ता के चरम पर पहुँचे झंडाधारी मुसलमानों की हर बार निंदा करनी होगी, और खुलकर करनी होगी। ये ज़ोर ज़ोर से, चिल्लाकर, हर पब्लिक प्लेटफ़ॉर्म पर, हर सोशल मीडिया में जाकर कहना होगा कि ये झंडेबाज लोग मुसलमान नहीं हैं। ये पागल हैं जो पैग़म्बर मोहम्मद या पवित्र क़ुरआन के बारे में कुछ भी नहीं जानते और भोले भाले लोगों को सही रास्ते से भटका रहे हैं।

अगर ऐसा नहीं होगा तो हमारे युवा हैदराबाद में पकड़ाए आइसिस के युवकों की तरह किसी के बहकावे में धर्म के नाम पर मंदिर में गोमाँस रख कर दंगा करवाने की फ़िराक़ में लगे होंगे। आपका इस बात पर बोलना ज़रूरी है, आपकी चुप्पी इनको एक मौन समर्थन दे रही है।

चुप्पी से किसी का भला नहीं होगा। आख़िर क्यों ऐसी ख़बरें आती हैं कि आइसिस बढ़ रहा है? आख़िर कौन वहाँ जा रहा है? वहाँ पढ़े लिखे युवक जा रहे हैं। यूरोप से, अमेरिका से, ऑस्ट्रेलिया से, पाकिस्तान से, भारत से, बांग्लादेश से… हर जगह से लोग इस्लाम को पूरी दुनिया में पहुँचाने के लिए गोली, बम, आत्मघाती हमलों और लोन वूल्फ अटैक का इस्तेमाल कर रहे हैं!

क्या आपको लगता है कि इस्लाम का एक पैसा भी भला होगा इस विचारधारा से? क्या आपको लगता है कि मोहम्मद और क़ुरआन का संदेश इन लोन वूल्फ अटैक और आत्मघाती हमलों से लोगों तक पहुँचेगा?

इससे इस्लाम के प्रति घृणा बढ़ती रहेगी। इससे लोगों में अपने पड़ोसी के लिए भी डर पैदा हो जाएगा जो कि एक बहुत ही भयावह बात है। अच्छे लोगों की चुप्पी, बुरे लोगों के हमलों से ज्यादा घातक है। इसलिए, बोलिए कि ये इस्लाम नहीं है और जो ‘अल्लाहु अकबर’ बोलते हुए लोगों को मार रहे हैं उन्होंने कभी भी क़ुरआन को समझा भी नहीं। आपका बोलना बहुत ज़रूरी है, बोलिए और दुनिया को बचाईए।

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