एंटर-मार फेसबुकिया कविताओं को बढ़ावा देना बंद कीजिए

अगर आप इन घटिया कवियों को प्रोत्साहन देते रहेंगे तो हिंदी कविता का मतलब छोटी-बड़ी लाइनें हो जाएँगी जिसमें आपको चाँद, ओस की बूँद, बारिश, घास, आँखें, होंठ का हिलना आदि चालीस-पचास चिरपरिचित शब्दों के झुंड के अलावा कुछ नहीं मिलेगा।

किताब पढ़िए, क्योंकि किताबें पढ़नी चाहिए

किताबें पढ़ने के लिए मत पढ़िए। किताबें मेट्रो के पोल में लटक कर दूसरे को इम्प्रैस करने के लिए मत पढ़िए। किताबें टाइम पास के लिए मत पढिए। किताबें बस पढ़िए। पढ़ते रहिए, पढ़ते रहना चाहिए।

Hashtag #Existence

The more the days are passing, the more disenchanted I am becoming. This disenchantment is from almost everything. No, I am not feeling suicidal. Not yet. I have realised, over a period of time, that things don’t matter. Or, to put in different way, I don’t matter to things. It is the Dickensian ‘Hard Times’… Continue reading Hashtag #Existence

सेकुलर राग: गाय हमारी माता है, हमको कुछ नहीं आता है!

बड़ी समस्या हो गई है। नहीं, लूज़ मोशन नहीं हुआ है। हाँ, कुछ सेकुलर लोगों को वर्बल डायरिया ज़रूर हो गया है। वैसे ये समस्या है नहीं। समस्या है कि कुछ लोग न सिर्फ पैदा हो गए हैं, बल्कि डार्विन के सर्वाइवल सिद्धांत को, फिटेस्ट ना होने के बावजूद, चुनौती देते हुए ज़िंदा बच गए… Continue reading सेकुलर राग: गाय हमारी माता है, हमको कुछ नहीं आता है!

बारिशों को होते रहना चाहिए

ऑफिस से निकला तो बारिश हो रही थी। बारिशों को समय समय पर होते रहना चाहिए। हम तो प्लुवियोफाईल नहीं है लेकिन ऐसे ही लगता है कि बारिशों का होना और होते रहना बहुत ज़रूरी है। बहुत चीजें धुल जाती हैं बारिशों में। समय के ना पहुँचने से और हवाओं की ग़ैरमौजूदगी में ज़मीं धूल… Continue reading बारिशों को होते रहना चाहिए

बाय डीफ़ॉल्ट

पुराने सालों की यादें थीं वो जो नए ज़माने के डिजीटल गलियारे में मुस्कुराती मिल गईं। दिल ने तो खँगाल फेंका था दोस्तों के समझाने पर। सबकुछ एक बार एक अंतिम बार देखा था। पूरी लाईब्रेरी को जिसकी हर किताब के हर पन्ने पर कहीं तुम्हारी उँगलियों के निशान तो कहीं तुम्हारीं होठों का लिप्स्टिक… Continue reading बाय डीफ़ॉल्ट