बिहार के ‘ख़ूनी’ बहार में पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या

ख़ैर सलमान की कार तो गूगल कार थी। तो हो सकता है रॉकी भी दिल्ली में होंगे और राजदेव जी ने कहीं रिवाल्वर बाँध दिया हो, और चलने को हुए हों तो ट्रिगर बँधे होने के कारण खिंच गया हो और उनकी मौत हो गई हो। ये लॉजिक ही सही है क्योंकि बिहार में तो बहार है और जो है सो नितीसे कुमार है!

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Who are you waiting for to ask you to think?

Don’t expect Kejriwals, Rahuls, Modis, Yechuris to express rage and concerns. Their rage is always political. Their concerns are always fake. Their candles burn on the wax of convenience and a socially-detached phenomenon called ‘politics’.

लिबरलों का इन्टॉलरेन्स और अप्रासंगिक डिब्बाबंद प्रोग्रेसिव विचारकों की छटपटाहट

अब इनकी जंग सत्ता और राजाश्रयी पुलाव खाने के लिए है। और अगर पुलाव ना मिल रही हो तो ये उसकी गंध के लिए भी नंगा होने के लिए तैयार हैं।

तृप्ति देसाई हाजी अली पर अतृप्त, पर तुम्हारी लड़ाई कौन लड़ेगा?

अच्छी बात ये है कि दस महिलाओं ने हिन्दू महिलाओं के लिए लड़ाई तो लड़ी, तुम्हारी लड़ाई कौन लड़ेगा? तुम्हें तीन तलाक़ो से निजात कौन दिलाएगा? तुम्हें पुरानी मस्जिदों में कौन पहुँचाएगा? तुम्हें किसी की चौथी विवाहिता होने से कौन बचाएगा? तुम्हे गणित और विज्ञान को शैतानी बताने वाले मुल्लों से कौन बचाएगा?

जाधवपुर यूनिवर्सिटी के वैचारिक दोगलेपन के बीच मोलेस्टेशन का चार्ज झेलते ‘बुद्धा’

इस फ़र्ज़ी डिबेट को काउंटर करने के लिए एक नैरेटिव की ज़रूरत है जो इन सड़ी हुई वामपंथी विचारधाराओं को इनके हर ग़लती, नौटंकी की याद दिला सके। ऐसे लोगों की ज़रूरत है जो इनकी नंगई और वैचारिक दोगलेपन को सामने ला सके।

बुंदेलखंड गई वाटर ट्रेन, अखिलेश यादव और प्राइम टाइम मीडिया के एंकर

बुंदेलखंड को गई वाटर ट्रेन बहुत कन्फ़्यूजिंग ट्रेन हो गई है। पहले ख़बर आई कि पानी वाली रेलगाड़ी को अखिलेश ने कहा कि ‘हमें नहीं चाहिए पानी, हमारे पास पानी है।’ फिर पता चला कि ट्रेन यार्ड में खड़ी है। नेता, मीडिया, हम, आप सब कूद लिए कि ये क्या बेहूदगी है, राजनीति अपनी जगह… Continue reading बुंदेलखंड गई वाटर ट्रेन, अखिलेश यादव और प्राइम टाइम मीडिया के एंकर

बंदर के हाथ नारियल, केजरीवाल के हाथ ट्विटर, एक ही बात है

अगर ऐसे ट्वीट से आम आदमी पार्टी के समर्थक निराश नहीं हैं तो उनको चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए। अगर लगता है कि इसी तरह की राजनीति नई राजनीति है तो आईना देखना बंद कर दीजिए, क्योंकि आप अपनी सूरत बर्दाश्त नहीं कर पाओगे अगर थोड़ी भी समझ है।