मीडिया, माता सोनिया और ऑगस्टा वैस्टलैंड

बहरहाल, दो बातें सामने हैं कि डील हुई थी और मनमोहन सरकार के समय ही हुई थी। डील में धूस देने वाले पकड़े जा चुके हैं लेकिन घूस लेने वाले का अता पता नहीं है।

दिल्ली चुनाव: एंकरों का चुनावी घाघरा तैयार हो रहा है

एंकरगण सूट पहनकर आएँगे लेकिन रोज़ की तरह वो कुर्सी पर बैठकर ज्ञान नहीं बाँटेंगे। दस तारीख़ को सबकुछ खड़े खड़े होगा। कौन जीतेगा, कौन हारेगा हमको नहीं पता… हमको कुछ नहीं पता…

चुनाव चर्चा: डीयू के चुनावों की याद में

“ज़रा हाथ मिलाईए मैडम, छू देगा तो आपकी ईज्जत नहीं जाएगी। हाँ वोट ज़रूर जाएगा। हाथ मिलाईए जोश में।” कंडीडेट को ये ज्ञान हमलोग देते थे। इसी में दस साल से आईएएस बनने की तैयारी करने वाले लौंडे अपना ठरकपन मिटा लेते थे हाथ देर तक पकड़ कर और गधों की तरह दाँत निपोड़ कर, “हें हें हें… आप ही को देंगे… वोट… हें हें हें!”