बलात्कार पर राजनीति सिर्फ केजरीवाल कर सकते हैं, यही ‘नई राजनीति’ है

केजरीवाल जी की नई राजनीति अब इतनी ज़्यादा प्रेडिक्टेबल हो गई है कि अगर वो अपनी जगह एक ऑटोमेटेड कॉलर ट्यून भी लगा दें कि ‘हमारे पास तो पुलिस नहीं है’, ‘हमारे हाथ मोदी जी ने बाँध रखे हैं’, ‘ये तो एमसीडी का मसला है और वहाँ भाजपा के लोग हैं’, ‘ये फ़िल्म बहुत अच्छी है, ज़रूर देखिए’, तो भी दिल्ली वासियों का काम चल जाएगा।

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बंदर के हाथ नारियल, केजरीवाल के हाथ ट्विटर, एक ही बात है

अगर ऐसे ट्वीट से आम आदमी पार्टी के समर्थक निराश नहीं हैं तो उनको चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए। अगर लगता है कि इसी तरह की राजनीति नई राजनीति है तो आईना देखना बंद कर दीजिए, क्योंकि आप अपनी सूरत बर्दाश्त नहीं कर पाओगे अगर थोड़ी भी समझ है।

दिल्ली देश नहीं है

पूरा टाईमलाईन आज नहीं पढ़ा दिन भर। कुछ लिखा भी नहीं, एक ने मेल करके झाड़ू पार्टी की जीत पर ‘शिगूफा’ छोड़ने कह दिया। भाजपा यहाँ हारी है या आआपा जीती है, या एक की जीत से दूसरी की हार हुई है, ये सब पॉलिटिकल एनालिस्ट लोग बता पाएँगे। हम कल भी भाजपा को वोट… Continue reading दिल्ली देश नहीं है