‘ज्वलंत’ मुद्दों के बीच मैं पार्टी बदल कर तटस्थ हो गया हूँ

वैसे तो समय तटस्थ रहने वालों का भी अपराध लिखेगा, दिनकर ने कहा है, पर कई मौक़ों पर जब समझ में ना आए तो खेमा पकड़ने से बेहतर है तटस्थ रह जाना।  जेएनयू और एन्टी-नेशनल काँड पर मैं अपने इग्नरेन्स के साथ तटस्थता की तरफ बढ़ रहा हूँ। आज पता चला वीडियो डॉक्टर्ड हैं! साला… Continue reading ‘ज्वलंत’ मुद्दों के बीच मैं पार्टी बदल कर तटस्थ हो गया हूँ

आप करें तो प्यार-व्यार, हम करें तो बलात्कार! 

विरोध, मतभेद और केरल की आजादी, भारत की बर्बादी में अंतर है, था और रहना चाहिए।  बाकी आपको जो ज्ञान बाँटना है बाँटिए। हम किसी को सर्टिफिकेट नहीं दे रहे, ना ही कोई हमें दे तो बेहतर है। मैं इस डिसेन्ट वर्सस सेडीशन के डिबेट में नहीं घुस रहा क्योंकि मुझे दोनों शब्दों के मायने… Continue reading आप करें तो प्यार-व्यार, हम करें तो बलात्कार! 

‘साइलेंस ऑफ़ द लेफ़्ट’, टाइप= कन्विनिएंट

सर? उ जेएनयू वाला काँड सुने क्या? अब कौन सा काँड हो गया बे? फिर कोई एमएमएस आया क्या? या फिर किसी ने सेक्सुअल ऑफेंस कर दिया? जेएनयू तो प्रोटेस्ट के साथ साथ भारत के तमाम विश्वविद्यालयों को ‘सेक्स, रेप और ‘फन टाइम” वाले आस्पेक्ट में पछाड़े हुए है। अरे नहीं सर, वो सब तो… Continue reading ‘साइलेंस ऑफ़ द लेफ़्ट’, टाइप= कन्विनिएंट

भड़वा, दल्ला कहने वाले ‘मासूम छात्र’

जो प्रोटेस्ट, ख़ासकर के इस तरह के प्रोटेस्ट, करने जाते हैं उन्हें ये पता होना चाहिए कि किसी को ‘दल्ला’ कहना और बाद में ‘मासूम छात्र’ बन जाना दोनों एक साथ संभव नहीं।