ज़िंदगी के तमाम सवाल और आत्महत्या

हास्य कलाकार महज़ एक कलाकार नहीं होता। वो समाज पर अपने ग़ुस्से को हास्य के रूप में प्रस्तुत करता है और उसे चलायमान रखता है। जब भी ऐसा कलाकार हमें छोड़कर जाता है तो सिर्फ़ कहने के लिए ही नहीं, बल्कि सच में, समाज का एक हिस्सा विलुप्त हो जाता है। सच है कि नए… Continue reading ज़िंदगी के तमाम सवाल और आत्महत्या

दिल गिरा कहीं पर… दफ्फातन…

  वो तेज़ी से मेट्रो की सीढ़ियाँ उतरता चला जा रहा था कि अचानक लगा जैसे वक़्त रुक गया हो। सब कुछ अचानक अपनी नैसर्गिक गति से दो सो गुणा कम पर आ गया हो… बगल से आॅफ-व्हाईट रंग की पारभासी टाॅप, गले में बहुत ही हल्का फ्लोरल पैटर्न वाला स्कार्फ़ जो गले में भी… Continue reading दिल गिरा कहीं पर… दफ्फातन…

भावविहीन नहीं थी वो

Image: Alex Masi लकड़ी की लाठी के छोर पर छोटा सा चुंबक लगाए जेठ की दोपहरी में सड़क के किनारों से कुछ बटोर रही थी। शायद लोहा बटोर रही थी जिसे वह पीठ पर लदे गँदले बोरे में डालती जा रही थी। उम्र कुछ आठ-नौ साल, बिखरे बाल, फटे कपड़े और भावविहीन चेहरा… बादल घिर… Continue reading भावविहीन नहीं थी वो

You are beautiful and so, I love you!

  Love is not natural to me. I don’t go in search of it. I don’t try to get in to it. But I do love. Love cannot be contained in mere three words that I never said. Or that I said several times. Did I say you that you are beautiful. What did you… Continue reading You are beautiful and so, I love you!