क्या यार! बलात्कार बंद हो गए…. बताईए!

देश में अचानक बंद हो गए बलात्कारों और ‘पेड़ पर लटके शवों’ के ना दिखने से मैं चिंतित हूँ। मैं ना तो दलित चिंतन कर पा रहा हूँ और ना ही इस घिनौने कृत्य की क्रांतिकारी रूप में भर्त्सना। सरकार को #RailFareHike अभी नहीं करना था। मीडिया को समाज के मज़े लेने देते कुछ दिन।… Continue reading क्या यार! बलात्कार बंद हो गए…. बताईए!

संवेदनशून्य मैं

आमतौर पर मैं आज़ादी या किसी और भी खुश होने वाले दिन खुश नहीं होता। कारण मुझे पता नहीं और न कभी मैंने इस विषय पर कोई आत्मचिंतन किया है । हो सकता है कि मुझे ज़रूरत महसूस न हुई हो। होने को तो प्याज का दाम भी कम हो सकता है और देश की… Continue reading संवेदनशून्य मैं

A rape is a rape

How does it affect or why is it a pain to accept that the girls who went to protest go to discos at night? How does it make it correct if a rape victim is characterless (who are you to decide that?)? What has character or profession to do with being raped? Is the rape of a prostitute any less traumatic then of a doctor or teacher (if at all you see a hierarchy)?