रोहित मर गया, और मरता रहेगा विश्वविद्यालयों के दंड-विधान के कारण

रोहित को मार डाला है इस तंत्र ने। इस हत्या का जिम्मेदार हमारा तंत्र है जहाँ विद्यार्थियों को काऊंसलिंग और बातचीत से समझाने की बजाय उसे बाहर निकाल दिया जाता है और उसके पढ़ने, बढ़ने का सारा ज़रिया रोक दिया जाता है। जब तक विरोध को दबाया जाएगा, कभी भी वाद-विवाद एक साकारात्मक मोड़ तक नहीं पहुँच सकता। तब तक ये समाज उसी गर्त मे गिरा रहेगा जहाँ है।

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ज़िंदगी के तमाम सवाल और आत्महत्या

हास्य कलाकार महज़ एक कलाकार नहीं होता। वो समाज पर अपने ग़ुस्से को हास्य के रूप में प्रस्तुत करता है और उसे चलायमान रखता है। जब भी ऐसा कलाकार हमें छोड़कर जाता है तो सिर्फ़ कहने के लिए ही नहीं, बल्कि सच में, समाज का एक हिस्सा विलुप्त हो जाता है। सच है कि नए… Continue reading ज़िंदगी के तमाम सवाल और आत्महत्या